बॉलीवुड की दुनिया में जब भी असली अभिनय और दमदार कहानियों की बात होती है, मनोज बाजपेयी का नाम सबसे ऊपर आता है। अपने किरदारों से दर्शकों के दिलों में जगह बनाने वाले बाजपेयी अब एक बार फिर चर्चा में हैं अपनी आगामी फिल्म ‘जुगनुमा: द फैबल’ को लेकर। खास बात यह है कि इस इंडी फिल्म को इंडस्ट्री के नामचीन फिल्ममेकर्स का भरपूर समर्थन मिल रहा है।
“इस फिल्म के समर्थन में इंडस्ट्री की कई बड़ी हस्तियां आगे आई हैं, जिनमें नामचीन निर्देशक अनुराग कश्यप, ऑस्कर जीत चुकीं प्रोड्यूसर गुनीत मोंगा, महानटी से पहचान बनाने वाले नाग अश्विन और तमिल सिनेमा के दिग्गज फिल्ममेकर वेत्रिमारन शामिल हैं।” इंडस्ट्री के बड़े नामों का यह समर्थन सिर्फ एक फिल्म के लिए नहीं बल्कि पूरे इंडी सिनेमा मूवमेंट के लिए अहम माना जा रहा है।
आज जब बड़े बजट और स्टार-कास्ट वाली फिल्मों का बोलबाला है, तब ‘जुगनुमा’ जैसी कहानियां यह साबित करती हैं कि सिनेमा सिर्फ ग्लैमर नहीं, बल्कि गहरी सोच और असली कला का माध्यम है। यही वजह है कि अनुराग कश्यप ने इसे “सिनेमा, बकवास नहीं” कहकर इसका खुला समर्थन किया।

जुगनुमा के निर्देशक राम रेड्डी (नीचे की पंक्ति में, बाएं से तीसरे) अपनी फिल्म की विशेष स्क्रीनिंग के अवसर पर अन्य प्रमुख फिल्म निर्माताओं के “Image Courtesy:Instagram/@bajpayee.manoj
👉 सवाल यह है कि आखिर ‘जुगनुमा’ में ऐसा क्या खास है, जिसने फिल्ममेकर्स को एकजुट कर दिया?
आइए जानते हैं विस्तार से।
“जब इंडस्ट्री के बड़े नाम किसी इंडी फिल्म के समर्थन में उतरें, तो समझ लीजिए कि कहानी में दम है!”
मनोज बाजपेयी जुगनुमा – एक नई इंडी क्रांति की शुरुआत
मनोज बाजपेयी हमेशा से ऐसे कलाकार रहे हैं जो कहानी की गहराई को प्राथमिकता देते हैं। शूल, सत्या और गली गुलियां जैसी फिल्मों से लेकर फैमिली मैन तक, उन्होंने साबित किया है कि असली स्टार वही है जो किरदार को जिए। ‘जुगनुमा: द फैबल’ उनकी इसी पहचान का अगला पड़ाव है।
फिल्म का विषय भले ही अभी पूरी तरह सामने नहीं आया है, लेकिन इंडस्ट्री से मिल रहे सपोर्ट ने दर्शकों की उम्मीदें कई गुना बढ़ा दी हैं। खासतौर पर सोशल मीडिया पर मनोज बाजपेयी के फैंस इसे एक “गेम-चेंजर” मान रहे हैं।
यह फिल्म इंडी सिनेमा को नई पहचान देने वाली साबित हो सकती है। मनोज बाजपेयी का मानना है कि “सिनेमा सिर्फ पैसे का खेल नहीं, बल्कि समाज को आईना दिखाने का जरिया है।” और ‘जुगनुमा’ इसी सोच का नतीजा है।
अनुराग कश्यप फिल्म सपोर्ट – “सिनेमा, बकवास नहीं”
अनुराग कश्यप हिंदी सिनेमा में प्रयोग और नए टैलेंट को मौका देने के लिए जाने जाते हैं। उन्होंने सोशल मीडिया पर साफ लिखा – “जुगनुमा सिर्फ फिल्म नहीं, असली सिनेमा है।” इस एक बयान ने फिल्म की चर्चा को और भी तेज कर दिया।
कश्यप का समर्थन सिर्फ एक ट्वीट या पोस्ट नहीं है, बल्कि यह संदेश है कि इंडस्ट्री में अब भी ऐसे लोग मौजूद हैं जो बड़े बैनर और चमक-धमक से ज्यादा कहानी और अभिनय को महत्व देते हैं। उनके साथ गुनीत मोंगा और नाग अश्विन जैसे फिल्ममेकर्स का खड़ा होना दिखाता है कि इंडी फिल्म्स का भविष्य उज्ज्वल है।
फिल्म समीक्षकों का भी कहना है कि जब अनुराग कश्यप जैसी शख्सियत किसी प्रोजेक्ट को सपोर्ट करती है, तो उस फिल्म को नज़रअंदाज़ करना नामुमकिन हो जाता है। यही कारण है कि ‘जुगनुमा’ रिलीज़ से पहले ही सुर्खियों में है।
इंडी फिल्म बॉलीवुड – एक नई उम्मीद
बॉलीवुड में इंडी फिल्मों की स्थिति हमेशा चुनौतियों से भरी रही है। बड़े बजट और स्टारडम के बीच छोटी फिल्मों के लिए जगह बनाना आसान नहीं होता। लेकिन अब हालात बदल रहे हैं। ‘जुगनुमा’ जैसी फिल्मों के आने से साफ है कि दर्शक सिर्फ मसाला एंटरटेनमेंट नहीं, बल्कि दमदार कंटेंट भी चाहते हैं।
इंडी फिल्में समाज की असलियत, संघर्ष और सच्चाई को सामने लाने का काम करती हैं। मनोज बाजपेयी जैसे कलाकार जब इंडी सिनेमा को अपनाते हैं, तो इससे बाकी फिल्ममेकर्स और दर्शकों को भी प्रेरणा मिलती है।
आज डिजिटल प्लेटफॉर्म्स ने भी इंडी फिल्मों के लिए नए दरवाजे खोल दिए हैं। जुगनुमा इसी ट्रेंड का हिस्सा है, जो यह साबित करेगी कि अच्छा कंटेंट हमेशा अपनी राह खुद बनाता है।
👉 यह फिल्म न सिर्फ बॉलीवुड बल्कि पूरी इंडस्ट्री में इंडी फिल्मों के पुनर्जागरण की शुरुआत बन सकती है।
मनोज बाजपेयी ‘जुगनुमा’ फिल्म
मनोज बाजपेयी की ‘जुगनुमा’ सिर्फ एक फिल्म नहीं, बल्कि इंडी सिनेमा के लिए आंदोलन जैसी है। अनुराग कश्यप और दूसरे फिल्ममेकर्स का समर्थन इस बात का सबूत है कि कंटेंट-ड्रिवन फिल्मों की मांग बढ़ रही है।
📢 अगर आप भी मानते हैं कि सिनेमा सिर्फ ग्लैमर नहीं बल्कि समाज की असली कहानियों को दिखाने का जरिया है, तो ‘जुगनुमा’ जरूर देखें और इंडी फिल्मों को सपोर्ट करें।














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