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नेपाल में हिंसा-आगजनी पर छलका मनीषा कोइराला का दर्द, सोशल मीडिया बैन ने भड़काया देश

"नेपाल में भड़की हिंसा पर मनीषा कोइराला ने तोड़ी चुप्पी, सोशल मीडिया पोस्ट में जताया दर्द (Image Courtesy: X/@mkoirala, X/@RawVox)"

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पड़ोसी देश नेपाल इन दिनों गहरी उथल-पुथल से गुजर रहा है। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर सरकार द्वारा लगाए गए प्रतिबंध ने युवाओं में गुस्से की आग भड़का दी है। लोकतंत्र की आवाज़ को दबाने और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर लगाम कसने की कोशिशों से आक्रोशित भीड़ सड़कों पर उतर आई। देखते ही देखते यह विरोध हिंसा और आगजनी में बदल गया। खबर लिखे जाने तक 20 से ज्यादा लोग अपनी जान गंवा चुके हैं और कई घायल अस्पतालों में जिंदगी और मौत से जूझ रहे हैं।

इस संकट के बीच बॉलीवुड एक्ट्रेस और नेपाल की बेटी मनीषा कोइराला ने भी अपना दर्द सोशल मीडिया पर बयां किया। उन्होंने कहा कि देश को हिंसा नहीं, संवाद की ज़रूरत है। मनीषा का यह भावुक संदेश नेपाल और भारत दोनों जगह तेजी से वायरल हो रहा है।

नेपाल की यह जंग सिर्फ सोशल मीडिया बैन तक सीमित नहीं है, बल्कि यह लोकतांत्रिक अधिकारों, नागरिक आज़ादी और नई पीढ़ी की उम्मीदों से भी जुड़ी है। सवाल यह है कि क्या सरकार अपनी नीतियों पर पुनर्विचार करेगी या फिर युवाओं का यह गुस्सा और भयंकर रूप लेगा?

“नेपाल की सड़कों पर जल रही आग सिर्फ टायरों की नहीं, बल्कि युवाओं के सपनों और उम्मीदों की है।”


 नेपाल सोशल मीडिया बैन विरोध

नेपाल सरकार ने हाल ही में फेसबुक, इंस्टाग्राम, एक्स (ट्विटर) और टिकटॉक जैसे लोकप्रिय सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर बैन लगाने का ऐलान किया। सरकार का तर्क है कि इन प्लेटफॉर्म्स पर फैलने वाली अफवाहें, फेक न्यूज और भड़काऊ कंटेंट समाज में अशांति फैला रहे हैं। लेकिन जनता और खासकर युवाओं का कहना है कि यह कदम उनकी आवाज़ को दबाने की कोशिश है।

सैकड़ों की संख्या में छात्र, नौजवान और नागरिक काठमांडू से लेकर छोटे-छोटे कस्बों तक सड़कों पर उतर आए। जगह-जगह प्रदर्शनकारियों और पुलिस के बीच झड़प हुई। सोशल मीडिया बैन को लोग सीधे-सीधे अपने लोकतांत्रिक अधिकारों पर हमला मान रहे हैं।

विशेषज्ञों का कहना है कि आज के दौर में सोशल मीडिया सिर्फ मनोरंजन या गपशप का जरिया नहीं रहा, बल्कि यह लोगों के विचार साझा करने, सरकार को जवाबदेह ठहराने और लोकतंत्र को मजबूत करने का अहम मंच बन चुका है। ऐसे में इस तरह का प्रतिबंध देश की लोकतांत्रिक छवि को नुकसान पहुंचा सकता है।


मनीषा कोइराला का बयान

नेपाल से ताल्लुक रखने वाली और बॉलीवुड में अपनी एक्टिंग से पहचान बनाने वाली मनीषा कोइराला भी इस मुद्दे पर चुप नहीं रहीं। उन्होंने सोशल मीडिया पर एक पोस्ट लिखकर देशवासियों से शांति की अपील की। मनीषा ने कहा,
“नेपाल की मिट्टी में हिंसा और खून-खराबे की जगह नहीं है। हमें संवाद और समझ से ही समाधान निकालना होगा।”

उनका यह संदेश नेपाल की मौजूदा स्थिति को देखकर और भी ज्यादा भावुक कर देने वाला था। लोगों ने इस पोस्ट को हाथों-हाथ लिया और हजारों कमेंट्स में मनीषा को अपना समर्थन दिया।

मनीषा कोइराला का बयान यह दर्शाता है कि सेलिब्रिटी सिर्फ फिल्मों तक सीमित नहीं होते, बल्कि जब देश पर संकट आता है तो वे अपनी ज़िम्मेदारी निभाने के लिए आगे आते हैं। उनकी यह भावनात्मक अपील कई युवाओं के लिए शांति और समझदारी का संदेश लेकर आई।


नेपाल में हिंसा और आगजनी

नेपाल में प्रदर्शन की आग अब हिंसा में तब्दील हो चुकी है। राजधानी काठमांडू सहित कई शहरों में गाड़ियों को आग लगा दी गई, सरकारी दफ्तरों पर पत्थरबाज़ी हुई और पुलिस पर हमला किया गया। सुरक्षाबलों को भीड़ को नियंत्रित करने के लिए लाठीचार्ज और आंसू गैस का इस्तेमाल करना पड़ा।

अब तक 20 से ज्यादा लोग अपनी जान गंवा चुके हैं और सैकड़ों घायल बताए जा रहे हैं। इंटरनेट सेवाओं पर भी रोक लगाई जा रही है ताकि विरोध और ज्यादा न फैल सके। हालात यह बता रहे हैं कि स्थिति धीरे-धीरे नियंत्रण से बाहर हो रही है।

विश्लेषकों का मानना है कि अगर सरकार ने जल्द ही युवाओं के साथ बातचीत नहीं की, तो यह हिंसा और बड़े राजनीतिक संकट में बदल सकती है। नेपाल जैसे छोटे और पहाड़ी देश के लिए यह अशांति लंबे समय तक घाव दे सकती है।


मनीषा कोइराला भावुक अपील

नेपाल का यह संघर्ष सिर्फ सोशल मीडिया बैन का विरोध नहीं है, बल्कि यह लोकतंत्र, स्वतंत्रता और युवा पीढ़ी की उम्मीदों की लड़ाई है। मनीषा कोइराला जैसी हस्तियों की भावुक अपील दिखाती है कि देश को आज सबसे ज्यादा जरूरत है शांति और संवाद की।

👉 अगर आप भी मानते हैं कि लोकतंत्र में जनता की आवाज़ सबसे बड़ी ताकत है, तो इस खबर को शेयर करें और अपनी राय कमेंट बॉक्स में जरूर लिखें।

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