ताज़ा ख़बर

दीपिका पादुकोण की 8 घंटे की शिफ्ट पर Hansal Mehta ने बॉलीवुड पर साधा निशाना, कहा- ‘थकान तो आम बात है, आराम करना तो सौभाग्य है’

“Hansal Mehta reacts to Deepika Padukone 8-hour shift | "Image Courtesy:instagram/@hansalmehta

कभी-कभी कोई छोटी सी बात सोशल मीडिया पर इतना बड़ा मुद्दा बन जाती है कि हर कोई उसी पर चर्चा करने लगता है। हाल ही में कुछ ऐसा ही हुआ जब दीपिका पादुकोण की “8 घंटे की शूटिंग शिफ्ट” पर बातें शुरू हुईं। लोगों को लगा — ‘वाह, कितना बढ़िया! इतने बड़े स्टार्स भी अब रेगुलर शिफ्ट्स में काम करते हैं।’ लेकिन फिर एंट्री होती है Hansal Mehta की — और यहीं से मामला दिलचस्प हो जाता है। Hansal Mehta ने बिना किसी लाग-लपेट के इस पर एक ऐसा ट्वीट किया, जिसने सबको सोचने पर मजबूर कर दिया। उन्होंने कहा — “थकान तो आम बात है, और आराम करना तो सौभाग्य है।”

बस, फिर क्या था! सोशल मीडिया पर हलचल मच गई। कुछ लोगों ने कहा, “वो बिल्कुल सही बोल रहे हैं”, तो कुछ ने कहा, “सेलेब्रिटीज़ को भी ब्रेक लेने का हक है।” मुझे इस बात ने सबसे ज्यादा जो छुआ वो ये था — कि आज भी बॉलीवुड में काम को लेकर कितनी अजीब सोच बनी हुई है। जैसे अगर कोई स्टार थोड़ा आराम कर ले, तो वो कम मेहनती कहलाता है।

चलिए, इस पूरे मामले को थोड़ा गहराई से समझते हैं — Hansal Mehta ने आखिर कहा क्या, और क्यों कहा?

“Hansal Mehta reacts to Deepika Padukone 8-hour shift | "Image Courtesy:instagram/@hansalmehta

“Hansal Mehta reacts to Deepika Padukone 8-hour shift | “Image Courtesy:instagram/@hansalmehta

Hansal Mehta दीपिका पादुकोण 8 घंटे शिफ्ट

तो हुआ यूं कि एक रिपोर्ट में दीपिका पादुकोण की “8 घंटे की शूटिंग शिफ्ट” का जिक्र आया। सुनने में तो सब नॉर्मल लगता है — आखिर दुनिया के ज्यादातर लोग 8 घंटे ही तो काम करते हैं, है ना? लेकिन बॉलीवुड में बात कुछ अलग होती है। वहाँ 8 घंटे की जगह कई बार 14-16 घंटे की शूटिंग चलती है। अब सोचिए, लाइट्स, मेकअप, रिटेक्स, और बार-बार डायलॉग रिपीट करना — कितना थकाने वाला होगा। ऐसे में दीपिका का 8 घंटे काम करना कुछ लोगों को बहुत “कम” लग गया। लेकिन जब Hansal Mehta ने इस पर अपनी राय रखी, तो उन्होंने साफ कहा — “थकान तो आम बात है, और आराम करना तो सौभाग्य है।”

इस एक लाइन में इतनी गहराई है कि अगर आप थोड़ा सोचें, तो समझ आएगा कि वो सिर्फ दीपिका की बात नहीं कर रहे थे, बल्कि पूरी फिल्म इंडस्ट्री की हकीकत पर इशारा कर रहे थे।
Hansal Mehta का ये कमेंट जैसे एक आईना था, जिसमें बॉलीवुड को खुद को देखने का मौका मिला। क्योंकि सच्चाई ये है कि यहाँ “आराम” अब एक लक्ज़री बन चुका है। और सच बोलूं तो ये सिर्फ सेलेब्रिटीज़ की बात नहीं है। आम लोग भी अब ऐसे दौर में जी रहे हैं जहाँ थकान को कमजोरी समझा जाने लगा है। जैसे अगर तुम कह दो, “मुझे ब्रेक चाहिए”, तो सामने वाला बोलेगा — “इतना काम नहीं कर सकते क्या?”

Hansal Mehta बयान

Hansal Mehta का ये बयान छोटा जरूर था, लेकिन असरदार इतना कि पूरी इंडस्ट्री में बहस छिड़ गई। कई लोगों ने इसे “रियलिस्टिक” कहा — क्योंकि सच में, फिल्मों की दुनिया उतनी ग्लैमरस नहीं जितनी दिखती है। कैमरे के सामने मुस्कुराने वाले स्टार्स को कैमरे के पीछे जाने कितने घंटे की मेहनत, रिहर्सल और थकावट झेलनी पड़ती है। Hansal Mehta ने एक इंटरव्यू में पहले भी कहा था कि फिल्ममेकिंग कोई आसान काम नहीं है — ये लोगों की कल्पना से कहीं ज्यादा मानसिक और शारीरिक थकाने वाला होता है। तो जब उन्होंने दीपिका की 8 घंटे की शिफ्ट पर ये बात कही, तो उसका मतलब था कि हमें काम और आराम के बीच संतुलन समझना चाहिए।

“Hansal Mehta reacts to Deepika Padukone 8-hour shift | "Image Courtesy:instagram/@hansalmehta

“Hansal Mehta reacts to Deepika Padukone 8-hour shift | “Image Courtesy:instagram/@hansalmehta

मुझे उनकी बात इसलिए भी सही लगी क्योंकि आजकल हर कोई “हसल कल्चर” में फंसा है। जैसे कि अगर तुम आराम कर रहे हो, तो तुम पीछे रह जाओगे। लेकिन Hansal Mehta ने उल्टा सोचने की हिम्मत दिखाई — उन्होंने कहा कि आराम करना कोई शर्म की बात नहीं, बल्कि सौभाग्य है। और सोचिए, अगर एक डायरेक्टर ऐसा कह रहा है, जो खुद लंबे-लंबे शेड्यूल में शूट करता है, तो बात में वजन तो है ही। उनके शब्दों में एक सच्चाई है — काम कितना भी जरूरी क्यों न हो, इंसानियत और स्वास्थ्य उससे बड़ा होता है।

Hansal Mehta के बारे में

अब जरा बात करते हैं Hansal Mehta की — वो शख्स जिनका नाम सुनते ही सिनेमा की सच्चाई याद आ जाती है। वो वही डायरेक्टर हैं जिन्होंने हमें Shahid, Citylights, Scam 1992 और Faraaz जैसी शानदार फिल्में दीं। उनकी फिल्मों में हमेशा एक बात कॉमन रहती है — रियल लाइफ से जुड़ी कहानियाँ, जिनमें इमोशन, सच्चाई और समाज की झलक मिलती है। Hansal Mehta को कभी “फॉर्मूला डायरेक्टर” नहीं कहा गया। वो हमेशा भीड़ से हटकर सोचते हैं। वो ऐसे निर्देशक हैं जो कैमरे के पीछे खड़े होकर सिर्फ एक्टर्स को नहीं, बल्कि दर्शकों को भी सोचने पर मजबूर कर देते हैं।

इसलिए जब उन्होंने दीपिका की 8 घंटे की शिफ्ट पर बयान दिया, तो लोगों ने इसे हल्के में नहीं लिया। क्योंकि Mehta वही इंसान हैं जो हर मुद्दे को दिल से देखते हैं — चाहे वो फिल्म इंडस्ट्री का हो या समाज का। उनके शब्द सिर्फ शब्द नहीं होते, उनमें एक नजरिया होता है — और इस बार उनका नजरिया काम और थकान की असली परिभाषा पर था। अगर मैं कहूँ तो Hansal Mehta बॉलीवुड के उन कुछ लोगों में से हैं जो ग्लैमर के पर्दे के पीछे की सच्चाई दिखाने की हिम्मत रखते हैं। उनका ये बयान किसी एक स्टार के लिए नहीं, बल्कि हर उस इंसान के लिए था जो थकान से जूझते हुए भी मुस्कुरा कर कह देता है — “मैं ठीक हूँ।”

मेरा सवाल

Hansal Mehta का बयान सुनकर मुझे खुद से ये सवाल पूछना पड़ा — “क्या हमने अपने जीवन में आराम करना बंद कर दिया है?” हम सब दिनभर भागते रहते हैं — काम, सोशल मीडिया, ज़िम्मेदारियाँ, टारगेट्स… और फिर जब थकान महसूस होती है,

आपका क्या मानना है — क्या Hansal Mehta की बात आज की भागदौड़ भरी दुनिया पर फिट बैठती है? नीचे कमेंट में बताइए कि आपके लिए “आराम” का क्या मतलब है 💬

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *