टीवी की दुनिया में “क्योंकि सास भी कभी बहू थी” की तुलसी बनकर घर-घर मशहूर हुईं स्मृति ईरानी आज भारतीय राजनीति की सबसे दमदार महिला नेताओं में से एक मानी जाती हैं। लेकिन सफलता की यह कहानी इतनी आसान नहीं थी। हाल ही में सोहा अली खान के पॉडकास्ट ऑल अबाउट हर में स्मृति ईरानी ने अपनी जिंदगी के कई अनकहे पहलुओं पर खुलकर बातचीत की।
उन्होंने साफ-साफ कहा कि एक दौर ऐसा भी था जब लोग उन्हें “बेकार” कहते थे। टीवी इंडस्ट्री में पुरुष कलाकारों को उनसे कहीं ज्यादा पैसे मिलते थे। आलोचना, संघर्ष और आर्थिक असमानता के बावजूद स्मृति ईरानी ने कभी हार नहीं मानी। यही जज़्बा उन्हें एक सफल अभिनेत्री से एक लोकप्रिय राजनेता बनने तक ले आया।
आज स्मृति ईरानी सिर्फ एक नाम नहीं बल्कि संघर्ष से सफलता तक पहुंचने वाली प्रेरणा हैं। उनकी कहानी हर उस इंसान के लिए सीख है, जो मुश्किलों से घबराकर सपने अधूरे छोड़ देता है।
“जब दुनिया ने कहा ‘तुमसे नहीं होगा’, तब स्मृति ईरानी ने साबित किया – ‘मैं कर दिखाऊंगी’!”
स्मृति ईरानी ने खुलासा किया
पॉडकास्ट में स्मृति ईरानी ने खुलासा किया कि इंडस्ट्री में उन्हें कई बार कम आंका गया। वह बताती हैं कि पुरुष एक्टर्स को उनसे दोगुना-तिगुना पे मिलता था। कई बार उन्हें यह भी सुनना पड़ा कि वह इस काम के लायक नहीं हैं।
- रजनीकांत को याद आया जब इलैयाराजा उनके साथ इतने नशे में थे कि वह रात के 3 बजे तक ‘एक कलाकार की तरह’ नाचते रहे ;
- Smriti Irani reveals people labelled her ‘crappy’: Male actor was getting paid more than me
उन्होंने कहा, “लोग मुझे बेकार कहते थे। लेकिन मैंने हर बार खुद को साबित किया।”
यह बयान सिर्फ एक व्यक्तिगत अनुभव नहीं बल्कि ग्लैमर वर्ल्ड में जेंडर पे गैप और भेदभाव की हकीकत भी उजागर करता है। स्मृति ने ये भी बताया कि आलोचना ने उन्हें और मजबूत बनाया। यही वजह है कि टीवी से लेकर राजनीति तक उन्होंने हर मंच पर अपनी अलग पहचान बनाई।
स्मृति ईरानी का संघर्ष
स्मृति ईरानी का जीवन हमेशा आसान नहीं रहा। दिल्ली के एक साधारण परिवार से आने वाली स्मृति ने कभी बड़े सपनों को नहीं छोड़ा। शुरुआती दिनों में उन्होंने मैकडॉनल्ड्स में काम किया, मॉडलिंग की और फिर धीरे-धीरे टीवी इंडस्ट्री में कदम रखा।
“क्योंकि सास भी कभी बहू थी” की तुलसी ने उन्हें सुपरस्टार बना दिया, लेकिन सफलता के बावजूद संघर्ष खत्म नहीं हुआ। इंडस्ट्री में असमानता, आलोचना और कम वेतन ने उन्हें झकझोरा।
लेकिन यही मुश्किलें स्मृति को मजबूत और आत्मनिर्भर बनाती रहीं। उन्होंने साबित किया कि यदि आप मेहनत और आत्मविश्वास के साथ डटे रहें, तो मंज़िल जरूर मिलती है।
स्मृति ईरानी का इंटरव्यू
सोहा अली खान के पॉडकास्ट इंटरव्यू में स्मृति ईरानी बेहद भावुक नज़र आईं। उन्होंने साफ शब्दों में कहा कि उनकी जिंदगी का हर संघर्ष एक नई सीख लेकर आया।
इंटरव्यू में उन्होंने जेंडर पे गैप, आलोचनाओं और चुनौतियों का जिक्र करते हुए यह भी कहा कि एक महिला होने के नाते उन्हें हर कदम पर खुद को साबित करना पड़ा।
यह इंटरव्यू सिर्फ स्मृति की निजी कहानी नहीं बल्कि उन तमाम महिलाओं की आवाज़ है, जो करियर में भेदभाव झेलती हैं। स्मृति ने यह संदेश दिया कि – “मुश्किलें आएंगी, लेकिन यदि हिम्मत नहीं हारोगे तो इतिहास लिखोगे।”
स्मृति ईरानी जज्बा
स्मृति ईरानी का जीवन एक सफलता की गाथा है – जिसमें संघर्ष भी है, आलोचना भी और जीत भी। उन्होंने कभी हालात के आगे हार नहीं मानी। चाहे टीवी की दुनिया हो या राजनीति का मैदान, हर जगह उन्होंने अपनी मेहनत और जज़्बे से पहचान बनाई।
उनकी यह कहानी हर युवा, हर महिला और हर सपने देखने वाले इंसान के लिए प्रेरणा है।












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