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20 साल बाद Abhishek Banerjee की थिएटर वापसी: ‘तू क्या है?’ से मंच पर गूँजी नई कहानी

Abhishek Banerjee performing in Tu Kya Hai play | "Image Courtesy:instagram/@nowitsabhi

बॉलीवुड और ओटीटी प्लेटफॉर्म्स पर अपने दमदार किरदारों से दर्शकों के दिलों में खास जगह बनाने वाले Abhishek Banerjee एक बार फिर उस सफर पर लौट आए हैं, जहाँ से उनकी एक्टिंग जर्नी की असली शुरुआत हुई थी—थिएटर। 20 साल के लंबे इंतज़ार के बाद उन्होंने एकल नाटक “तू क्या है?” के साथ रंगमंच पर शानदार वापसी की है।

Abhishek Banerjee को आपने ‘Paatal Lok’ के हाथीराम के साथी “हाथी राम केटीएम का कॉन्स्टेबल” जैसे गहरे किरदारों में देखा होगा या फिर ‘Stree’ जैसी फिल्मों में उनकी कॉमिक टाइमिंग का मज़ा लिया होगा। लेकिन उनकी असली जड़ें हमेशा थिएटर से जुड़ी रही हैं। इतने सालों बाद उनका मंच पर लौटना सिर्फ एक परफॉर्मेंस नहीं बल्कि आत्मा की घर वापसी है।

उन्होंने खुद इस मौके पर कहा—“थिएटर पर लौटना मेरे लिए ऐसा है जैसे मैं अपने घर आ गया हूँ। यहाँ कोई दिखावा नहीं, कोई रीटेक नहीं… बस सच और आप।” आज के दौर में जहाँ कलाकारों पर सोशल मीडिया की लाइमलाइट और दिखावे का दबाव होता है, Abhishek Banerjee की यह वापसी एक ताज़ा हवा की तरह महसूस होती है। उनकी इस जर्नी ने एक बार फिर साबित किया कि थिएटर किसी भी कलाकार की आत्मा का आईना होता है।

“20 साल की दूरी, एक सवाल ‘तू क्या है?’ और Abhishek Banerjee की रंगमंच पर घर वापसी।”

Abhishek Banerjee performing in Tu Kya Hai play | "Image Courtesy:instagram/@nowitsabhi

Abhishek Banerjee performing in Tu Kya Hai play | “Image Courtesy:instagram/@nowitsabhi

Abhishek Banerjee थिएटर वापसी

थिएटर को हमेशा से एक्टिंग का असली गुरुकुल कहा जाता है। कैमरा, लाइट्स और रीटेक्स की दुनिया से परे, थिएटर कलाकार को एक सच्चा मंच देता है जहाँ उसकी हर गलती, हर भाव और हर संवाद रियल टाइम में दर्शकों तक पहुँचता है। यही वजह है कि Abhishek Banerjee की थिएटर वापसी इतनी खास बन जाती है।

Abhishek ने अपने शुरुआती दिन दिल्ली के थिएटर से शुरू किए थे। कॉलेज लाइफ में ही उन्होंने मंच पर एक्टिंग की बारीकियाँ सीखी और आगे चलकर फिल्मों में अपनी जगह बनाई। लेकिन जब बॉलीवुड और ओटीटी के प्रोजेक्ट्स ने उन्हें पूरी तरह व्यस्त कर दिया, तो थिएटर धीरे-धीरे उनकी जिंदगी से दूर होता चला गया। 20 साल बाद जब उन्होंने ‘तू क्या है?’ जैसे गहरे और सवाल खड़े करने वाले नाटक से वापसी की, तो उन्होंने साफ कहा—“मैंने थिएटर को मिस किया। यहाँ आकर लगता है कि मैं अपनी जड़ों से फिर जुड़ गया हूँ। यह घर जैसा है।”

उनकी इस वापसी से न सिर्फ फैंस उत्साहित हैं बल्कि थिएटर जगत भी खुश है। एक सफल अभिनेता का इतने साल बाद मंच पर लौटना यह दिखाता है कि चाहे करियर कितना भी आगे बढ़ जाए, थिएटर की आत्मा हर कलाकार के अंदर जिंदा रहती है।

क्या आपको भी लगता है कि एक्टर की असली पहचान थिएटर ही बनाता है?

तू क्या है नाटक Abhishek Banerjee

“तू क्या है?” नाटक का नाम ही दर्शकों को सोचने पर मजबूर करता है। यह एकल नाटक (solo play) है, जिसमें सिर्फ Abhishek Banerjee मंच पर नज़र आते हैं। लेकिन खास बात यह है कि उनकी परफॉर्मेंस इतनी दमदार है कि दर्शक पूरा समय उसी दुनिया में खो जाते हैं। नाटक का केंद्र एक ऐसा सवाल है जिसे हर इंसान खुद से पूछता है—“तू क्या है?” यह सवाल केवल मंच पर बोले गए संवाद भर नहीं हैं, बल्कि यह दर्शकों की आत्मा को झकझोर देता है। इस नाटक में Abhishek एक अभिनेता की जद्दोजहद, उसके संघर्ष और समाज में उसकी असली पहचान की खोज को सामने लाते हैं।

उन्होंने बताया कि इस नाटक का मकसद केवल कहानी सुनाना नहीं है, बल्कि दर्शकों के साथ आत्म-चिंतन करना है। उनका कहना है—“आज की दुनिया में कलाकारों से ज्यादा दिखावे की उम्मीद की जाती है। लेकिन थिएटर आपको असली सच दिखाता है। यहाँ आप वही होते हैं जो अंदर से हैं।” ‘तू क्या है?’ ने रिलीज़ होते ही थिएटर प्रेमियों में उत्साह जगा दिया। सोशल मीडिया पर भी दर्शकों ने इसे “आंखें खोलने वाला अनुभव” और “Abhishek Banerjee का बेस्ट परफॉर्मेंस” बताया।

“अगर आपने Abhishek Banerjee को फिल्मों और वेब सीरीज में देखा है, तो ‘तू क्या है?’ आपको उनका बिल्कुल नया चेहरा दिखाएगा।”

थिएटर और Abhishek Banerjee

थिएटर और Abhishek Banerjee का रिश्ता बेहद गहरा है। जहाँ एक तरफ फिल्में और वेब सीरीज ने उन्हें ग्लोबल पहचान दिलाई, वहीं थिएटर ने उन्हें आत्मिक संतुष्टि दी। उन्होंने एक इंटरव्यू में कहा था—“थिएटर मेरे लिए मंदिर जैसा है। यहाँ दर्शक और कलाकार दोनों एक-दूसरे की आत्मा से जुड़ते हैं। स्क्रीन पर आप किरदार निभाते हैं, लेकिन मंच पर आप अपनी सच्चाई निभाते हैं।”

थिएटर ने उन्हें एक्टिंग की बारीकियाँ सिखाईं—जैसे वॉइस मॉड्यूलेशन, इमोशनल कंट्रोल और लाइव ऑडियंस से संवाद बनाने की कला। यही कारण है कि उनके स्क्रीन रोल्स भी हमेशा प्राकृतिक और असली लगते हैं। 20 साल बाद मंच पर लौटकर Abhishek Banerjee ने यह संदेश भी दिया कि चाहे कोई कितना भी बड़ा अभिनेता क्यों न बन जाए, अपनी जड़ों की तरफ लौटना जरूरी है। उनकी यह वापसी थिएटर समुदाय के लिए भी एक प्रेरणा है।

“क्या आज के युवाओं को भी थिएटर से जुड़ना चाहिए ताकि उनकी कला और मजबूत हो?”

Abhishek Banerjee कलाकार का मंच

Abhishek Banerjee की थिएटर वापसी सिर्फ एक कलाकार का मंच पर लौटना नहीं है, बल्कि यह उस यात्रा का हिस्सा है जहाँ हर अभिनेता को खुद से सामना करना पड़ता है। “तू क्या है?” के जरिए उन्होंने हमें याद दिलाया कि कला का असली आनंद न तो ग्लैमर में है और न ही सोशल मीडिया की लाइक्स में, बल्कि उस सच्चाई में है जो मंच पर सामने आती है।

उनकी यह वापसी थिएटर जगत के लिए नई ऊर्जा और दर्शकों के लिए नई उम्मीद लेकर आई है। यह हमें यह भी सिखाती है कि चाहे कोई कितनी भी सफलता हासिल कर ले, जड़ों की तरफ लौटना हमेशा जरूरी है।

👉 अगर आप भी थिएटर, बॉलीवुड और सेलेब्रिटी न्यूज़ से जुड़े अपडेट चाहते हैं नीचे कमेंट में हमें बताइए— और क्या आप Abhishek Banerjee को थिएटर में लाइव देखना चाहेंगे?

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