सुशांत सिंह का खुलासा: जब सत्या फिल्म के सेट पर सहना पड़ा संघर्ष और अपमान

सुशांत सिंह का खुलासा: जब सत्या फिल्म के सेट पर सहना पड़ा संघर्ष और अपमान | "Image Courtesy:Instagram/@officialsushantsingh/@ rgvzoomin

बॉलीवुड की चमक-दमक के पीछे एक कड़वी सच्चाई छिपी होती है—सफलता की राह कभी आसान नहीं होती। पर्दे पर दमदार किरदार निभाने वाले कलाकार भी अपने शुरुआती दिनों में अपमान, असुविधा और संघर्ष से गुजरते हैं। ऐसा ही किस्सा साझा किया है मशहूर अभिनेता सुशांत सिंह ने, जिन्हें हम आज ‘द लेजेंड ऑफ भगत सिंह’, ‘जंगल’, और ‘13 बी’ जैसी फिल्मों के लिए याद करते हैं।

सुशांत सिंह ने हाल ही में एक इंटरव्यू में बताया कि कैसे राम गोपाल वर्मा की कल्ट फिल्म ‘सत्या’ के सेट पर उन्हें अपमानजनक स्थिति का सामना करना पड़ा था। वह उस समय इंडस्ट्री में नए थे और किसी ने उन्हें पहचाना तक नहीं। सेट पर एक सहायक निर्देशक ने उनके साथ दुर्व्यवहार किया और उन्हें ईंटों पर बैठा दिया।

यह किस्सा सिर्फ सुशांत सिंह की स्ट्रगल स्टोरी नहीं है, बल्कि उन तमाम कलाकारों की झलक भी है, जो स्टार बनने से पहले अनगिनत कठिनाइयों का सामना करते हैं।


“हर चमकदार सितारे के पीछे एक अनकही जद्दोजहद छिपी होती है। सुशांत सिंह का यह किस्सा उसी का सबूत है।”


सुशांत सिंह का खुलासा: जब सत्या फिल्म के सेट पर सहना पड़ा संघर्ष और अपमान | "Image Courtesy:Instagram/@officialsushantsinghrgvzoomin

सुशांत सिंह का खुलासा: जब सत्या फिल्म के सेट पर सहना पड़ा संघर्ष और अपमान | “Image Courtesy:Instagram/@officialsushantsingh

सुशांत सिंह स्ट्रगल स्टोरी 

सुशांत सिंह की जिंदगी आसान नहीं रही। यूपी के एक छोटे से कस्बे से निकलकर उन्होंने मुंबई का रुख किया, लेकिन यहां हर दिन एक जंग जैसा था। शुरूआत में उन्हें छोटे-छोटे रोल मिले, जिनमें उनकी मौजूदगी तक लोगों को याद नहीं रहती थी।

उनकी सबसे बड़ी चुनौती थी—पहचान बनाना। उन्होंने कई बार ऑडिशन दिए, रिजेक्ट हुए, और सेट पर बेइज्जती भी झेली। बावजूद इसके उन्होंने हार नहीं मानी। सुशांत मानते हैं कि संघर्ष ने ही उन्हें मजबूत बनाया।

उनकी कहानी हर उस नए कलाकार की झलक है जो सपनों की नगरी मुंबई में कामयाबी की तलाश में आता है।


 सत्या फिल्म सेट अनुभव 

सुशांत सिंह का सबसे बड़ा झटका तब लगा जब वे राम गोपाल वर्मा की फिल्म ‘सत्या’ के सेट पर पहुंचे। फिल्म का क्रेडिट तो उनके करियर में मील का पत्थर बना, लेकिन शूटिंग के शुरुआती दिनों में उन्होंने जो सहा, वह कड़वा अनुभव था।

उन्होंने बताया कि एक दिन सेट पर उन्हें बैठने के लिए जगह तक नहीं दी गई। एक सहायक निर्देशक ने उन्हें ईंटों पर बैठा दिया और अपमानजनक लहजे में बात की। उस वक्त सुशांत ने सोचा कि शायद वह इस इंडस्ट्री के लिए बने ही नहीं हैं।

लेकिन किस्मत को कुछ और ही मंजूर था। इसी फिल्म से उन्हें पहचान मिली और लोग उनके अभिनय को नोटिस करने लगे।


 राम गोपाल वर्मा बॉलीवुड किस्सा 

राम गोपाल वर्मा की फिल्मों का जिक्र आते ही बॉलीवुड में एक अलग ही चर्चा छिड़ जाती है। उन्होंने हमेशा नए चेहरों को मौका दिया और इंडस्ट्री में अलग किस्म का सिनेमा पेश किया।

सुशांत सिंह का किस्सा भी इसी का हिस्सा है। हालांकि शुरुआती दिनों में उन्हें एक असिस्टेंट डायरेक्टर से रूखा व्यवहार झेलना पड़ा, लेकिन खुद राम गोपाल वर्मा ने बाद में उनकी एक्टिंग की तारीफ की। यही वजह है कि ‘सत्या’ फिल्म सुशांत के करियर का टर्निंग प्वाइंट बनी।

यह घटना आज भी बॉलीवुड के संघर्ष की असलियत को उजागर करती है कि यहां सिर्फ टैलेंट ही काफी नहीं, बल्कि धैर्य और हिम्मत भी चाहिए।



सुशांत सिंह  स्ट्रगल स्टोरी

सुशांत सिंह की यह स्ट्रगल स्टोरी आज भी लाखों नए कलाकारों के लिए प्रेरणा है। उनका मानना है कि असफलता और अपमान भी करियर की सीढ़ियों का हिस्सा हैं। अगर उन्होंने उस वक्त हार मान ली होती तो शायद हम आज इतने दमदार किरदारों में उन्हें न देख पाते।

बॉलीवुड की दुनिया बाहर से जितनी खूबसूरत दिखती है, अंदर से उतनी ही कठिन है। लेकिन जो लोग डटे रहते हैं, वही आखिरकार अपनी पहचान बना पाते हैं।


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सत्या फिल्म संघर्ष और अपमान

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