फिल्म इंडस्ट्री में काम करने के तरीके और घंटों को लेकर एक नई बहस छिड़ गई है। अभिनेत्री दीपिका पादुकोण ने हाल ही में इंटरव्यू के दौरान कहा कि शूटिंग सेट्स पर भी तय समय सीमा यानी 8 घंटे की शिफ्ट होनी चाहिए। उनका मानना है कि जिस तरह कॉर्पोरेट वर्ल्ड में कर्मचारियों का समय तय होता है, वैसे ही कलाकारों और तकनीकी टीम के लिए भी नियम होने चाहिए।
दीपिका के इस बयान के बाद चर्चा का दौर शुरू हो गया। कई लोगों ने उनकी बात को सही ठहराया, लेकिन कुछ ने इसे अव्यावहारिक करार दिया। इस बहस में”मामला तब और गर्म हो गया जब ‘अर्जुन रेड्डी’ और ‘एनिमल’ जैसी ब्लॉकबस्टर फिल्मों के निर्देशक संदीप रेड्डी वांगा ने स्पष्ट कहा कि सिनेमा निर्माण को किसी ‘9 से 5 की नौकरी’ की तरह सीमित नहीं किया जा सकता।”
अब इस पूरे विवाद में अभिनेता अदिवी शेष भी कूद पड़े हैं। उन्होंने इस पर अपना नजरिया साझा करते हुए संतुलित बयान दिया है, जो सोशल मीडिया पर काफी चर्चा का विषय बना हुआ है।
तो आखिर यह पूरा विवाद है क्या, किसने क्या कहा और अदिवी शेष का क्या कहना है? आइए विस्तार से जानते हैं।

अदिवी सेष ने दीपिका पादुकोण और संदीप रेड्डी वांगा की 8 घंटे की शिफ्ट विवाद के बारे में बात की । “Image Courtesy:Instagram/@deepikapadukone/@adivisesh
दीपिका पादुकोण का 8 घंटे शिफ्ट वाला बयान
दीपिका पादुकोण का मानना है कि फिल्म इंडस्ट्री में भी वही अनुशासन और प्रोफेशनल सिस्टम होना चाहिए, जैसा अन्य सेक्टर्स में देखने को मिलता है। उनका कहना है कि लगातार बदलते और लंबे शूटिंग शेड्यूल्स न केवल कलाकारों पर बल्कि पूरी तकनीकी टीम पर भी अतिरिक्त दबाव डालते हैं। साथ-साथ मेकअप आर्टिस्ट, कैमरामैन और बाकी तकनीकी स्टाफ पर भी दबाव डालते हैं।
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दीपिका मानती हैं कि अगर काम को सही तरह से मैनेज किया जाए तो सीमित समय में भी बेहतरीन रिजल्ट मिल सकते हैं। उनके मुताबिक, तय समय होने से न सिर्फ वर्क-लाइफ बैलेंस बेहतर होगा बल्कि सभी की प्रोडक्टिविटी भी बढ़ेगी।
हालांकि, इंडस्ट्री के एक हिस्से का कहना है कि फिल्म शूटिंग हमेशा परिस्थितियों पर निर्भर होती है। मौसम, लोकेशन और टेक्निकल जरूरतों के चलते कई बार शेड्यूल तय घंटों में खत्म करना संभव नहीं होता। यही वजह है कि दीपिका के बयान ने बड़ा विवाद खड़ा कर दिया।
संदीप रेड्डी वांगा का जवाब और विवाद
निर्देशक संदीप रेड्डी वांगा ने दीपिका के विचारों से साफ असहमति जताई। उनका कहना था – “फिल्म बनाना कभी भी 9 से 5 की नौकरी की तरह नहीं हो सकता। यह पूरी तरह से एक क्रिएटिव प्रोसेस है, और इसमें वक्त की पाबंदी लगाना नामुमकिन है।”
वांगा का मानना है कि फिल्म को विज़न के मुताबिक बनाने में कई बार 12–15 घंटे भी लगाने पड़ सकते हैं। अगर हर कोई समय पूरा होते ही सेट छोड़ दे, “इस स्थिति में बड़े स्तर पर बनने वाली फिल्मों को तय समय सीमा में पूरा करना बेहद मुश्किल हो जाएगा।”
उनके इस बयान के बाद सोशल मीडिया पर दो गुट बन गए। एक ओर लोग उनकी बात को डायरेक्टर्स की मुश्किलों को समझने वाला मान रहे हैं, वहीं दूसरी ओर कई यूज़र्स का कहना है कि यह कलाकारों और क्रू की सेहत के साथ समझौता है।
अदिवी शेष की प्रतिक्रिया
इस बहस पर अभिनेता अदिवी शेष ने अपनी राय रखी और कहा कि सच दोनों ही पक्षों में छिपा है। उनके अनुसार, फिल्म इंडस्ट्री का काम निश्चित रूप से 9 से 5 जैसा नहीं हो सकता, लेकिन इसका मतलब यह भी नहीं कि लोगों से 15–16 घंटे लगातार काम लिया जाए।
अदिवी ने कहा कि कलाकार और तकनीकी टीम तभी अच्छा काम कर पाएंगे जब उन्हें पर्याप्त आराम और निजी जीवन का समय मिलेगा। उन्होंने सुझाव दिया कि भले ही 8 घंटे की शिफ्ट पूरी तरह लागू न हो, लेकिन सीमित घंटे और ब्रेक्स ज़रूर होने चाहिए।
उनकी इस सोच को इंडस्ट्री और फैंस दोनों ने काफी सराहा। कई लोगों ने कहा कि अदिवी की राय व्यावहारिक और संतुलित है क्योंकि उन्होंने न तो क्रिएटिविटी को नकारा और न ही कामगारों की समस्याओं को अनदेखा किया।
दीपिका पादुकोण बहस
दीपिका पादुकोण का 8 घंटे की शिफ्ट वाला विचार, संदीप रेड्डी वांगा का विरोध और अदिवी शेष की संतुलित राय—तीनों ने मिलकर फिल्म इंडस्ट्री में काम करने के तौर-तरीकों पर नई बहस छेड़ दी है।
सवाल यही है कि आने वाले समय में क्या फिल्म जगत भी तय काम के घंटों और वर्क-लाइफ बैलेंस की ओर कदम बढ़ाएगा या फिर क्रिएटिविटी के नाम पर लंबे और थकाऊ शेड्यूल ही सामान्य रहेंगे?
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